السلف الصالح

السلف  الصالح

ما  هو  موضوع  السلف
اقصد  السلف الصالح  هل  هو  معناة  ان  هناك  خلف  غير  صالح  ولماذا  غير  صالح
هل  كانوا  المجاورين  للرسول هم  السلف  الصالح  وما  عداهم  هم الخلف  الغير  صالح
هذا  يؤكد الآية  التى  تقول   كنتم  خير  امة  اخرجت  للناس –  لاحظ   كلمة – كنتم –  انها  فى  زمن  الماضى وليس  المضارع
هل  هذا  معناة ان  النهر  العذب  السلسبيل  فى  بداياتة  يكون  سائغا  للشاربين منة  ثم  مع  مرور  الأزمنة و  تقلبات  الأحوال الجوية من  عواصف  و رياح  محملة  بالأتربة
والملوثات  وتدخل  الأنسان  كشريك  فى  هذا  التلوث البيئى قد  غير  من  مواصفات  هذا  النهر  واصبح  لا  يصلح  للاستخدام  الآدمى و تبدا  الناس  فى  هجرة  او  تركة
ليتحول  الى  ماء  آسن  غير  مقبول و غير  مستخدم   ولا  نافع للانسانية –  هل  النهر  او  الينبوع فى  بدايتة  مثل  نهاية  مجراة  مؤكد  انهما  طرفان للنهر  غير  متساويان فى  التركيبة
الحيوية –  ربما  اكون  مقصرا  فى  التعبير  عن  ما  ادركة  و  افهمة  انا
المطلوب  هو  قياس  ذلك اى  المتغيرات  المادية  التى  طرأت  على  النهر  على  المدركات  الروحية  لا  الحسية  اى  السلوكيات  التى  طرأ  عليها  التغيير  وتحلت  من  السلف  الصالح
الى  الخلف المتدنى  لا  المتدين  وا  تدين  ربما  تدين  شكلا  لا  موضوعا  مثل  كأس  الماء الذى  يبرق  و  يلمع لكن  محتواة مغشوش او  درجة  ثانية او  بة  عيوب – ديفو-
هكذا  نحن  الآن   نعيش مثل  حياة  النهر  فى  الوقت  الحالى
كنا  خير  امة  ثم  تغير  الحال و  اصبحنا  غير  صالحين  فى  نظر  الأمم  الأخرى
كنا  مقبولين  مثل  مياة  النهر  لذة  للشاربين  والآن   لا  اعلم  ما  هو  شكل  الأنسان  الحالى فى  عيون  الآخرين
لقد  تقلبت الأنسانية  مثل  الأحوال  الجوية –  هبوب  شعوب  على  شعوب  اخرى ينزلون  عليهم  كالأعصار  و  العواصف
كذلك تدخل  الأنسان  فى الدين  بحيث تم  تغيير  المفاهيم  و  السلوكيات  مثل  تدخل  الأنسان  فى  مجرى  النهر العذب  مما  ادى  الى  اتساع  الفجوة  بين  ما  هو  قائم  فعلا  و  ما  هو
متاح  للناس  – لذلك  فان  بعض  الناس  بدأت  فى  هجر  بعض  التعاليم  الالهية  واستخدمت  التعليم  التى  هى  من  صنع  الأنسان –  كذلك  هناك  اشخاص  يضيفون  الى  الدين اشياء
هو  برىء  منها  او  يخصمون  اشياه من  جوهر  الدين  نفسة  فتتسع  الفجوة  بين  ما  هو  حقيقى الى  ما  هو  مزيف يتعلق  بالشكليات  لا  بالجوهر   لذلك  نتج  عن  ذلك  الخلف  البعيد
حقيقة  التعاليم  الالهية  التى  اشتركت  فيها  جميع  الأديان  و  تلهفت  اليها  كل  الأنسانية الساعية الى  تحقيق  العدل  اولا  ثم  كل  شىء  يأتى  بعد  العدل
اى  حكم  عادل لشخص غير  مؤمن  افضل  من  حكم ظالم  لشخص مؤمن
هكذا  دائما  تتغير  مصبات  الأنهار   وتكون بخلاف  مصادر  الأنهار –  هكذا  التعاليم  الألهية  تحتاج  الى  تجديد  وخلق  مصادر للأنهار  جديدة
انها  دورة  حياة  للأنهار  و  الأمطار  و  البخار –  دائرة  مغلقة لحركة  المياة  المتجددة  –  كذلك  احتياجاتنا  من  اللة  متجددة – حتى يكون  السلف  الصالح ناقلا الى  الخلف نفس
الشعلة  المتوهجة  ليكون  على  نسق  السلف الصالح حتى  يتمكنوا  من  السباحة فى  بحور  الحياة  المتلاطمة
طبعا  انا  استخدمت  كلمة  السلف الصالح هنا  لأنها  شاعت  كثيرا  بين  الناس  لحنينهم  الى الأيام  الخوالى  و  يتمنون ان  يعيدوها  الى  كرتها  الأولى –  انها  فعلا  تكرر  و  تتكرر
كما  بدأكم  تعودون  – كلما اصبحتم  بعيدون فن  اللة  يبدأ  فى  تقريبكم  الية  من  خلال  ارسال  رسالة  للبشرسة  والا  كيف يتصل  بكم فنة  ينتقى انسانا  و  يجعل  من رسولا
من  يرغب  ان  يضيف  يبدا  فى  الأضافة   او  الخصم  كما  يشاء
اننى  افكر  بصوت  عالى  فقط

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